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वेंटिलेटर तो बनवा दिए गए कलेक्टर साहब अब बताइए, चलाएगा कौन..?

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कोरोना वारियर्स उन्हें कहा गया है जो इस महामारी के दौर में सबसे आगे रहकर कोविड-19 से पॉजिटिव मरीजों की सेवा अपनी जान की परवाह किए बिना कर रहे हैं, लेकिन सतना जिला अस्पताल के कुछ डॉक्टर ऐसे हैं जिन्हें कोरोना वारियर्स कहना इस शब्द की ही तौहीनी होगी। जी आपने बिल्कुल सही पढ़ा मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि जो जानकारी मेरे पास है उसके मुताबिक सतना जिला अस्पताल के कुछ डॉक्टर महज नाम के हैं, मुफ्त की तनख्वा ले रहे हैं, इन्हें अपनी जिम्मेदारी से कोई लेना पाना नहीं, इनकी करतूतों को देखकर तत्काल उन्हें बर्खास्त कर दूसरे डॉक्टर्स की नियुक्ति जिला अस्पताल में कर देनी चाहिए, मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं यह आप भी जान लीजिए।


वेंटिलेटर चलाएगा कौन…
वेंटीलेटर लाइफ सपोर्टिंग एक ऐसी मशीन है जिसमें क्रिटिकल केस वाले पेशेंट को रखा जाता है इसे चलाने के लिए बेहद अनुभवी और योग्य डॉक्टर की जरूरत होती है सतना जिला अस्पताल में 6 वेंटिलेटर मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी के मैराथन प्रयास से इंस्टॉल होकर रेडी खड़े हैं लेकिन फिर भी अब तक वेंटिलेटर सेवा शुरू नहीं हो पाई है। “”अब जरा गौर करिए गा”” ऐसा नहीं है कि सतना जिला अस्पताल में इन्हें चलाने वाले नहीं, डॉ आरके गुप्ता, डॉ रंजना सिंह, डॉ के एल सूर्यवंशी, और डॉ लक्ष्मी मंगलानी यह वह डॉक्टर है जिनमे वेंटिलेटर को पूरी कुशलता के साथ चलाने की योग्यता हैं। अब आप जान चुके हैं की यह बात पूरी तरह से गलत है की जिला अस्पताल में वेंटिलेटर चलाने वाला कोई नहीं अब बात यहां आकर अटकती है की वेंटिलेटर मशीन मे 24 घंटा डॉक्टर की नजर होनी आवश्यक होती है, यानी कि जहां भी वेंटिलेटर मशीन होगी वहां एक डॉक्टर का होना आवश्यक है, अब यदि जिला अस्पताल के यह डॉक्टर दावा करें कि हम चौबीसों घंटे मरीजों की सेवा कर रहे हैं तो वेंटिलेटर क्यों नहीं चालू है?


2 डॉक्टर कोरोना पोजटिव, तो 2 अपने कर्तव्य से हटे पीछे
आपको बता दें कि इन चार डॉक्टर्स में डॉक्टर के एल सूर्यवंशी और डॉक्टर लक्ष्मी मंगलानी कोरोना पोजटिव है। अब बाकी के 2 डॉक्टर रंजना सिंह और आरके गुप्ता के बारे में भी जान लीजिए। मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी ने ग्वालियर से इंजीनियर बुलाकर जिस दिन वेंटिलेटर रेडी करवाया, इस बात की जानकारी जैसे ही डॉ रंजना सिंह को लागी उन्होंने अपना मोबाइल ही बंद कर लिया, वजह यह थी कि कहीं उन्हें वेंटिलेटर चलाने के लिए ना बुला लिया जाए, क्योंकि वह अपना एयर कंडीशन घर से निकलकर अस्पताल नहीं आना चाहती, अब दूसरे डॉ आर के गुप्ता जी के बारे में भी जान लीजिए आईसीयू में जब वेंटिलेटर लगाए गए तब आरके गुप्ता जी को बुला लिया गया मजबूरी में बेचारे आ तो हो गए, लेकिन आईसीयू में घुसने से पहले उनके हाथ पैर फूल गए और एक बच्चे की तरह स्कूल ना जाने वाली जैसी हरकत करने लगे, किसी ने कान में बोला चिंता मत करिए ज्यादा देर अंदर नही रहना है थोड़ा दिखावा करके वापिस चले आइएगा, लंबी सांस लेकर गुप्ता जी अंदर तो चले गए, लेकिन जैसे ही विधायक और बड़े अधिकारी अस्पताल से गए गुप्ता जी ऐसे फुर्र हुए ढूंढने से भी नहीं मिल रहे थे।


कलेक्टर को आना होगा आगे…
मुझे लगता है कि अब सारी स्थितियां स्पष्ट हो गई होंगी और यह भी अंदाजा लग गया होगा कि आखिर सतना जिला अस्पताल में वेंटिलेटर किसी तकनीकी अभाव के कारण नहीं चल रहे या,, किसी निकम्मे पन के कारण। अब आप भी उस बात का समर्थन कर रहे होंगे जो मैंने शुरुआत में ही कही थी की इन डॉक्टर्स को कोरोना वारियर्स कहना इस शब्द की तौहीन होगी, ऐसे में सतना कलेक्टर को आगे आकर कुछ कड़े निर्णय लेने होंगे, देखना होगा कि यह सारी बातें बाहर आने के बाद भी क्या सतना कलेक्टर अजय कटेसरिया कोई ठोस कदम उठाते हैं या खामोश राहकर वह भी इनका समर्थन कर रहे।
(मृदुल पाण्डेय की रिपोर्ट)

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