कुपोषण का कलंक: सतना में 5 माह में तीसरी मासूम की मौत, दावों पर फिर सवाल……

मध्यप्रदेश के सतना जिले में कुपोषण की भयावह तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। पांच माह के भीतर तीसरी बार एक मासूम ने दम तोड़ दिया, जिसने व्यवस्था के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। बुधवार शाम करीब 5 बजे मासूम सुप्रांशी ने अपनी मां की गोद में अंतिम सांस ली।
जानकारी के अनुसार, बच्ची पहले से ही कुपोषण की चपेट में थी। मंगलवार को हालत गंभीर होने पर इलाज शुरू किया गया। बुधवार सुबह कुछ सुधार दिखा, लेकिन दोपहर बाद अचानक तबीयत बिगड़ गई। बीपी गिरने और हार्ट रेट बढ़ने पर करीब 2 बजे वेंटीलेटर पर रखा गया, मगर दो घंटे की जद्दोजहद के बाद जिंदगी की लड़ाई हार गई।
घटना के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या हर बार कार्रवाई नोटिस तक ही सीमित रहेगी?
विपक्ष ने भी मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि जब पोषण अभियान और स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, तब ऐसी घटनाएं जमीनी हकीकत उजागर कर देती हैं। आखिर योजनाएं कागजों से बाहर क्यों नहीं आ पा रहीं?
यह सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की परीक्षा है। कुपोषण अब आंकड़ा नहीं, बल्कि लगातार दोहराई जा रही त्रासदी बन चुका है। जरूरत है जवाबदेही तय करने की, ताकि दावे नहीं, जिंदगियां बच सकें।