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बाघिन मचमची की मौत के बाद वन विहार से बाघ पंचम को गुजरात भेजा, अब 13 ही बचे

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भोपाल।।वन विहार नेशनल पार्क में बाघों का कुनबा नहीं बढ़ रहा है। आगे भी कब तक बढ़ पाएगा, इसका कोई पता नहीं है। उधर बाघों की लगातार मौत अलग हो रही है। बाघिन मचमची की मौत होने और बाघ पंचम को गुजरात के निजी चिड़ियाघर को देने के बाद अब यहां 13 बाघ बचे हैं। वहीं एक वर्ष के भीतर तीन तेंदुओं की मौत भी हो चुकी है। इनकी संख्या यहां आठ रह गई है।

दरअसल, पार्क में वन्यप्राणियों की मौत की एक बड़ी वजह उनका उम्रदराज होना है लेकिन कुछ मौत संदिग्ध परिस्थितयों में हो चुकी है। जानकारी के मुताबिक इंदौर चिड़ियाघर वन्यप्राणियों का कुनबा बढ़ाने में लगातार सफल रहा है, जबकि वन विहार में मौत का सिलसिला जारी रहा। अब अगर नए वन्यप्राणी नहीं आए तो कुछ ही वर्षों में पर्यटकों को बाघ, तेंदुए, सिंह, भालू आदि देखने के लिए नहीं मिल सकेंगे।

पांच साल में ऐसी रही बाड़े वाले वन्यप्राणियों की संख्या

वन्यप्राणी–2017–2018–2019–2020–2021–2022

बाघ–5–6–9–6–14–13

सिंह–0–0–4–6–5–2

तेंदुआ– 5–9–10–10–11–8

भालू–5–9–24–23–21–14

हायना– 2–2–2–2–2–1

मगर–12–1–12–12–13–13

बायसन–3–3–2–2–2–2

घड़ियाल–1–1–3–3–3–3

जलीय कछुआ–23–28–23–33–33–33

————–

ऐसे घटते-बढ़ते गए खुले में विचरण्ा करने वाले वन्यप्राणी

वन्यप्राणी–2017–2018–2019–2020–2021–2022

चीतल– 506–523–504–549–555–522

सांभर– 278–285–314–385–388–362

नीलगाय– 64–65–69–94–86–81

जंगली सुअर– 48–53–54–43–87–90

मोर– 85–114–121–65–114–257

सियार– 60–76–94–47–48–51

लंगूर– 40–67–73–37–49–60

काला हिरण — 55–57–68–93–82–71

चौसिंघा– 4– 1–06–5–7–3

सेही– 3–20–20–20–1–3

बारहसिंगा– 9– 12–14–15–10–11

जंगली बिल्ली– 0–3–03–3–0–3

खरगोश– 1–0–0–6–1–1

नोट: आंकड़े वन विहार नेशनल पार्क प्रबंधन की समय-समय पर जारी की जाने वाली आकलन रिपोर्ट के अनुसार है।

बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए नए सिरे से प्रयास करेंगे। इसके लिए नई उम्र के वन्यप्राणियों की जरूरत है, इसे पूरा करेंगे। नए सिरे से केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को लिखेंगे। जहां तक मौत की बात है तो ज्यादातर मौत उम्रदराज होने के कारण हुई हैं।

पदमप्रिया बालाकृष्णन, डायरेक्टर, वन विहार नेशनल पार्क

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