Home देश “अब दिल’ से भी दूर हुए शिवराज..!; राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात के बाद शिवराज की “दक्षिण’ में तैनाती। एमपी छोड़ दी गई केरल, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु की जिम्मेदारी।

“अब दिल’ से भी दूर हुए शिवराज..!; राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात के बाद शिवराज की “दक्षिण’ में तैनाती। एमपी छोड़ दी गई केरल, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु की जिम्मेदारी।

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अमित मिश्रा,

जगत मामा यानी सबके प्रिय शिवराजसिंह चौहान अब कावेरी, गोदावरी नदी वाले दक्षिण के राज्यों में पार्टी का काम संभालेंगे। राज्य भी वे हैं, जिनमें से एक की भी सीमा मध्यप्रदेश से नहीं छूती यानी लाड़लियों के मामा और बहनों के भाई अब देश के दिल यानी एमपी से दूर हो गए। वे जाना तो नहीं चाहते थे, लेकिन रवाना कर दिए गए। उन्हें विकसित भारत यात्रा के जरिये दक्षिण के चार अहम राज्यों में पार्टी का कामकाज बढ़ाना है।

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और जगत मामा शिवराजसिंह चौहान देश के दिल यानी मध्यप्रदेश से दूर कर दिए गए हैं। अब मध्यभारत का ये जमीनी नेता दक्षिण भारत में पार्टी का कामकाज संभालेगा। दक्षिण भारत के चार अहम राज्यों केरल, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु की जवाबदेही प्रदेश के मामा यानी शिवराजसिंह को दी गई है। वे इन राज्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कामकाज से जुड़ी विकसित भारत यात्रा का कामकाज देखेंगे। उन्हें इन राज्यों में इस “सरकारी यात्रा’ का प्रभारी बनाया गया है।

राजनीति के पंडितों ने शिवराज के मामले में उम्मीद संगठन में कुछ दायित्व देकर किसी राज्य के प्रभारी बनाने की लगाई थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। “दिल्ली दरबार’ के उत्तर भारत से सुदूर दक्षिणी राज्यों में शिवराज की रवानगी के फरमान ने प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है।

अब तक शिवराजसिंह मैदान में तेवर दिखा रहे थे। दिल्ली न जाने और अपने लिए कुछ न मांगने के दावे के बीच पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शिवराज को मंगलवार को दिल्ली बुलाया था। दोनों नेताओं की मुलाकात पर सबकी नजर थी। चुनाव परिणाम आने और सीएम पद से दूर होने के बाद शिवराज की ये पहली दिल्ली यात्रा थी। इतने लंबे समय तक प्रदेश के मुखिया होने और अटल, अाडवाणी युग के सीनियर नेता होने के नाते उन्हें बड़ी जवाबदारी मिलने की उम्मीदें ज्यादा थीं। कोई उन्हें संगठन में बड़े पद पर देख रहा था तो कोई उन्हें केंद्र सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री मानकर चल रहा था।

हालांकि ये दोनों विकल्प पार्टी के समक्ष जरूर हैं, लेकिन ये सब पूर्व मुख्यमंत्री के “मूवमेंट्स’ से तय होगा कि उन्हें दिल्ली दरबार “मेन स्ट्रीम” में रखे या नेपथ्य में? फिलहाल तो मामा को प्रदेश से दूर पार्टी का कामकाज बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है, जिसे शिवराज ने सहर्ष स्वीकार भी कर लिया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा भी पार्टी में कोई छोटा-बड़ा नहीं, सब समान हैं। जो काम पार्टी देगी कार्यकर्ता होने के नाते मुकम्मल करूंगा।

हालांकि लगे हाथ उन्होंने ये भी जोड़ा की राज्य में भी रहूंगा, दक्षिण में भी रहूंगा यानी आवाजाही बनी रहेगी। मजे की बात है कि शिवराज सिंह को उस यात्रा का प्रभारी बनाया गया है जो इस प्रदेश में बिना किसी प्रभार के घूम रही है। यानी कि केंद्र सरकार की उपलब्धियों से जुड़ी ये यात्रा पार्टी कम, सरकारी बंदोबस्त से ज्यादा चल रही है। अमूमन सभी राज्यों में इस यात्रा में ऐसा कुछ “आसमानी-सुल्तानी’ नहीं, जो शिवराज सिंह जैसे सीनियर नेता को इसकी जिम्मेदारी दी जाए और वो भी दक्षिणी राज्यों की…! भाजपा के शीर्ष नेतृव का ये निर्णय सबको चौंका रहा है।

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