अरबपति बनने की होड़ मे राजस्व तंत्र पर दाग? सतना का एक चर्चित पटवारी सुर्खियों में……

सतना। शहर के राजस्व अमले में एक चर्चित पटवारी इन दिनों सुर्खियों में है। व्यापारी, किसान और जमीन कारोबारी वर्ग के बीच यह चर्चा आम है कि संबंधित पटवारी जमीन से जुड़े कार्य जैसे नाप-जोख, नामांतरण या अन्य राजस्व प्रक्रियाओं के बदले सीधे हिस्सेदारी (पार्टनरशिप) की मांग करता है। आरोप है कि वह जमीन खरीद-फरोख्त के सौदों में खुद को शामिल करने का दबाव बनाता है और कम रेट में हिस्सेदारी का प्रस्ताव रखता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन जमीनों पर उसकी नजर होती है, वे अक्सर अचानक विवादों में घिर जाती हैं। स्टे लगवाने, सीमांकन अटकाने या अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं के जरिए सौदे को उलझा दिया जाता है, जिससे खरीदार पीछे हट जाए और बाद में वही जमीन कथित तौर पर पटवारी नेटवर्क के माध्यम से ली जा सके। रीवा रोड और बगहा बायपास क्षेत्र के कुछ बड़े सौदों को लेकर भी ऐसी ही चर्चाएं जोरों पर हैं, जिनमे पटवारी की बड़ी हिस्सेदारी बताई जाती है।
दिलचस्प पहलू यह भी है कि कभी जिन वरिष्ठ साथियों के साथ उक्त पटवारी काम करता था, अब उन्हीं से दूरी और टकराव की बातें सामने आ रही हैं। आरोप हैं कि उसने अपने ही सहयोगियों को पीछे करने के लिए उनके कामकाज पर सवाल खड़े किए और खुद को मजबूत किया।
हाल ही में राजस्व विभाग मे हुई एक कार्रवाई को लेकर भी शहर में चर्चा है कि वास्तविक भूमिका किसी और की थी, लेकिन कार्रवाई कहीं और हो गई। लोग इसे प्रभाव और पहुंच का नतीजा बता रहे हैं।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रहे सवाल राजस्व तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर चिंता खड़ी करते हैं !