विंध्य व महाकौशल में कुपोषण की गहरी जड़ें: विकास के वादों के बीच दम तोड़ते सपने……

मध्य प्रदेश का विंध्य व महाकौशल क्षेत्र- रीवा, सतना, सीधी, शहडोल, सिंगरौली और अनूपपुर आज भी कुपोषण और एनीमिया की भयावह गिरफ्त में है।
एनएफएचएस-05 के आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि यहाँ स्टंटिंग, वेस्टिंग और एनीमिया की दर प्रदेश औसत से कहीं अधिक है।
यह समस्या केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर मंडराता वास्तविक संकट है। कुपोषण बच्चों के दिमागी विकास, सीखने की क्षमता और जीवनभर की आर्थिक संभावनाओं को स्थायी रूप से अपंग बना देता है।
विडंबना यह है कि यह वही विंध्य है जिसने प्रदेश और देश को बड़े नेता, ताकतवर ब्यूरोक्रेट और प्रभावशाली व्यक्तित्व दिए। लेकिन विकास की चमक से दूर, आज यही इलाका सबसे अधिक उपेक्षित और दयनीय स्थिति में खड़ा है, और बच्चे इसका सबसे बड़ा मूल्य चुका रहे हैं।
कुपोषण की जड़ें गर्भ में ही पनपती हैं। गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन स्तर 7 से नीचे, यह किसी भी स्वास्थ्य तंत्र की सबसे बड़ी असफलता है। ऐसी माताओं से जन्म लेने वाले बच्चे शुरुआत से ही संघर्ष की तरफ धकेल दिए जाते हैं। सतना में हाल ही हुई दो मासूमों की मौत केवल आँकड़ा नहीं… यह चेतावनी है, एक ऐसी त्रासदी जो बताती है कि यहाँ विकास की बात सिर्फ मंचों पर होती है, जमीन पर नहीं।
सबसे कटु सच्चाई यह भी है कि विंध्य में प्रदेश का उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री होने के बावजूद यह क्षेत्र विकास साझेदारों की प्राथमिकता सूची में सबसे नीचे है।
न बड़े प्रोजेक्ट, न ठोस हस्तक्षेप बस फोटो, भाषण और कागज़ी योजनाओं का तामझाम। राजनीतिक प्रतिनिधि सड़क–नाली उद्घाटनों में व्यस्त और प्रशासनिक अधिकारी रिपोर्टों की फाइलों में सुकून ढूँढते दिखाई देते हैं। आंगनवाड़ियों की जर्जर हालत और स्वास्थ्य संस्थानों की हकीकत देखने की फुर्सत किसी के पास नहीं।
जब राजनीतिक इच्छा–शक्ति कमजोर हो, प्रशासनिक दृष्टि संकीर्ण हो और विकास की रणनीति पक्षपातपूर्ण हो, तब परिणाम यही होते हैं: भूख से सिकुड़ते बचपन, और एक ऐसा भविष्य जो पैदा होते ही हार मानने को मजबूर हो जाता है।
अब वक्त है कि इस झुलसे सच पर ध्यान दिया जाए।
कागज़ी उपलब्धियों और झूठे दावों से नहीं,
साहसिक निर्णयों, ठोस निवेश और जवाबदेही से।
यदि अभी नहीं… तो शायद कभी नहीं।
विंध्य व महाकौशल के बच्चों को हम यूँ ही खोते रहेंगे और इतिहास गवाही देगा कि सबसे बड़ा अन्याय हमने ही किया….