अनूपपुरकटनीजबलपुरदेशमध्यप्रदेशरीवाशाहडोलसतनासिंगरौलीसीधी

विंध्य-महाकौशल में कुपोषण का गहराता संकट……


NFHS-05 के आंकड़े चौंकाते, विकास साझेदार पीछे क्यों हटे?

मध्य प्रदेश के विंध्य व महाकौशल क्षेत्र रीवा, सतना, सीधी, शहडोल, सिंगरौली और अनूपपुर आज भी कुपोषण की भयावह स्थिति से जूझ रहे हैं।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-05) बताता है कि यह क्षेत्र खतरे की लाल रेखा पर खड़ा है। प्रदेश में ही कुपोषण राष्ट्रीय औसत से अधिक है और इन जिलों में परिस्थिति उससे भी खराब।

चौंकाने वाले आँकड़े

NFHS-05 के अनुसार मध्य प्रदेश में…
• स्टंटिंग: 35–36%
• अंडरवेट बच्चे: 32%+
• एनीमिया: 67%+ बच्चे

इन जिलों में यह दरें और अधिक दर्ज हुईं, जिससे बच्चों का मस्तिष्क व शारीरिक विकास गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञ चेताते हैं..
कुपोषित बच्चों का भविष्य उनसे छीन लिया जाता है।


विकास साझेदारों की वापसी पर गंभीर सवाल….

यूनिसेफ, कई NGO और CSR संस्थाएँ कभी यहाँ सक्रिय थीं, लेकिन अब अधिकांश पीछे हट चुकी हैं। आखिर क्यों उस क्षेत्र को अकेला छोड़ दिया गया, जहाँ प्रयासों की सबसे ज्यादा आवश्यकता थी?
क्या प्रशासनिक समन्वय और निगरानी में खामियाँ थीं?
क्या नीति स्तर पर इच्छाशक्ति कम पड़ी?


सरकार से 5 सीधे सवाल…..

• इन जिलों के लिए स्पष्ट पोषण रणनीति क्या है?
• साझेदारों की सक्रियता घटने पर जवाबदेही कौन लेगा?
• योजनाओं का जमीनी असर क्यों कमजोर है?
• आंगनवाड़ी–ASHA–ANM को आवश्यक संसाधन कब मिलेंगे?
• क्या बढ़ते जोखिम पर आपात पोषण हस्तक्षेप होगा?


कुपोषण सिर्फ स्वास्थ्य नहीं, भविष्य का संकट……

कुपोषित बच्चों में

• IQ व सीखने की क्षमता कम विकसित
• स्मरण-शक्ति व प्रतिस्पर्धा कौशल कमजोर
• पूरी जिंदगी पिछड़ेपन का खतरा


योजनाएँ मजबूत, क्रियान्वयन कमज़ोर..

• ICDS
• मिड डे मील
• पोषण अभियान
• मातृ वंदना योजना

कागज़ मजबूत, लेकिन असर कम क्यों?
क्या डेटा वास्तविकता कह रहा है, या सेवाएँ सही हाथों तक पहुँच ही नहीं रहीं?


जानकारों का कहना है की विंध्य व महाकौशल के बच्चे सिर्फ कुपोषित नहीं बल्कि वे अवसर, शिक्षा और भविष्य से वंचित किए जा रहे हैं।
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को पारदर्शिता से स्पष्ट करना होगा की कुपोषण मुक्त मध्य प्रदेश का सपना इन जिलों में कब और कैसे पूरा होगा?


Related Articles

Back to top button