सोहावल में हड्डी फैक्ट्री पर फिर उठे सवाल: आदेश के बाद भी संचालन, प्रशासन की चुप्पी क्यों?…..

सतना। सोहावल क्षेत्र में संचालित मेसर्स सोहावल बोन इंडस्ट्रीज एक बार फिर विवादों में है। बस्ती और देवीजी मंदिर के समीप स्थित यह हड्डी फैक्ट्री स्थानीय लोगों के लिए गंभीर समस्या बन चुकी है। रहवासियों का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाली तेज दुर्गंध और सड़ांध के कारण वातावरण प्रदूषित हो रहा है तथा लोग बीमार पड़ रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों ने कलेक्टर, एसडीएम रघुराजनगर ग्रामीण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस अधीक्षक से लिखित शिकायत की है। उनका कहना है कि न्यायालय के आदेशों के बावजूद फैक्ट्री का संचालन जारी है। मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ तक पहुंचा, जहां डब्ल्यूपी क्रमांक 32621/2024 में 24.10.2024 को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि फैक्ट्री की समस्त प्रक्रियाएं तत्काल प्रभाव से बंद की जाएं और परिसर में संग्रहीत हड्डियां हटाई जाएं। इसके बाद भी कुछ दिनों की बंदी के पश्चात फिर से संचालन शुरू होने का आरोप है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि संस्थान की वैधता 30.09.2004 तक थी और वर्तमान में आवश्यक सहमति प्राप्त नहीं है।
शिकायत के बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 152 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। सवाल यह है कि जब वैध अनुमति नहीं है और न्यायालय का आदेश स्पष्ट है, तो फिर संचालन कैसे जारी है?
ग्रामीणों का आरोप है कि रात के समय चोरी-छिपे हड्डियों की पिसाई की जाती है, जिससे दुर्गंध और बढ़ जाती है। मंदिर, आवासीय बस्ती और नेशनल हाईवे के पास इस तरह की गतिविधि क्या पर्यावरणीय मानकों का खुला उल्लंघन नहीं है?
कुछ लोगों ने मृत पशुओं की हड्डियों के उपयोग और कथित अवैध गतिविधियों की भी जांच की मांग की है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शी जांच आवश्यक मानी जा रही है।
अब बड़ा प्रश्न यह है कि क्या जिला प्रशासन न्यायालय के आदेशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करेगा? क्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नियमित निरीक्षण करेगा? और क्या आमजन को स्वच्छ वातावरण का अधिकार मिलेगा?
सोहावल की जनता स्पष्ट जवाब चाहती है, कार्रवाई कब और कैसे होंगी…?