स्कूली ऑटो में मासूम से दरिंदगी, परिजनों के लिए सबक, सतर्कता ही बच्चों की सुरक्षा…..
अमित मिश्रा/सतना।

सतना। दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। शहर के एक निजी स्कूल की केजी वन की महज़ साढ़े चार साल की बच्ची स्कूली ऑटो में दुष्कर्म का शिकार हो गई। यह घटना केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि हर अभिभावक के लिए एक कड़ा सबक है कि बच्चों को आंख मूंदकर भरोसे पर छोड़ना कितनी बड़ी चूक साबित हो सकती है।
कैसे हुआ हादसा
19 अगस्त को बच्ची रोजाना की तरह स्कूल से छुट्टी के बाद ऑटो से घर लौट रही थी। उस दिन नियमित चालक मनीष ने अपनी जगह परिचित राजकुमार दहिया (21) को ऑटो चलाने के लिए भेज दिया। बच्चों को उतारते हुए आरोपी ने मासूम को अकेला पाकर गलत हरकत की और चुप रहने के लिए गला दबाने व माता-पिता को मारने की धमकी दी। बच्ची डर के मारे कुछ नहीं बोली, लेकिन अगले दिन तबियत बिगड़ने पर मां ने जब बार-बार पूछा तो उसने पूरी घटना बताई। परिजन तुरंत थाना पहुंचे और पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
परिजनों के लिए सबक
यह मामला केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की आंख खोलने वाला है।
- बच्चों के आने-जाने और उनके साथ रहने वालों पर पैनी नजर रखें।
- परिचित या भरोसेमंद समझकर भी बच्चों को अकेला न छोड़ें।
- खासकर छोटी बच्चियों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतें।
- बच्चों से निरंतर संवाद करें और उन्हें सिखाएं कि किसी भी गलत हरकत को छिपाना नहीं है।
समाज के लिए संदेश
आज अपराधियों की गंदी मानसिकता सोशल मीडिया, अश्लील वीडियो और विकृत मनोरंजन से और जहरीली हो रही है। मासूम बच्चे, जो सही से बोल भी नहीं पाते, सबसे असुरक्षित हो गए हैं। ऐसे में समाज को एकजुट होकर अपराधियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग करनी चाहिए। सजा इतनी कड़ी हो कि वह नजीर बने और कोई दरिंदा दोबारा इस तरह की हिम्मत न कर सके।
यह घटना हमें साफ संदेश देती है कि सतर्कता ही सुरक्षा है। बच्चों की मासूमियत बचाना केवल परिजनों ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। अब समय आ गया है कि हर नागरिक सजग बने और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।