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सतना में कानून के सामने बड़ी चुनौती: दहशत में मोहल्ला, खामोश लोग…..

पुलिस पर पथराव के बाद बड़े एक्शन का इंतजार!

सतना/अमित। सतना के कोलगवां थाना क्षेत्र अंतर्गत हनुमान नगर नई बस्ती (वार्ड क्रमांक-15) में पुलिस टीम पर हुए पथराव की घटना ने जिले की कानून-व्यवस्था, पुलिसिंग और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि उस भय के माहौल का आईना है, जिसमें आज भी लोग जीने को मजबूर हैं।

घटना के बाद जब हमारी टीम मौके पर पहुंची, तो हालात बेहद चिंताजनक नजर आए। मोहल्ले में सन्नाटा था, चेहरे सहमे हुए थे और जुबानें खामोश। दबी आवाज में कुछ लोगों ने बताया कि मोहल्ले में घरों के बाहर खड़ी गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई, लेकिन इसके बावजूद कोई खुलकर सामने आने को तैयार नहीं है। वजह साफ है-डर….

लोगों को आशंका है कि बयान देने पर उन्हें या उनके परिजनों को परेशान किया जा सकता है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, इलाके में लंबे समय से कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोग सक्रिय हैं, जो रात के समय खाली मैदानों में बैठकर शराबखोरी, गाली-गलौज और हुड़दंग करते हैं। महिलाओं और बच्चों के लिए रात में बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। यही नहीं, विरोध करने या शिकायत करने वालों को डराया-धमकाया जाता है। सवाल यह है कि यह सब अचानक नहीं हुआ, फिर भी समय रहते सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

बीती रात जब इन्हीं नशेड़ियों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, तो हालात और बिगड़ गए। पुलिस टीम को घेरकर न केवल अभद्रता की गई, बल्कि पत्थर बरसाए गए।

वीडियो में पुलिसकर्मियों पर की गई गंदी गालियां भी कैद हुई हैं। यही वजह है कि वीडियो को व्यापक रूप से सार्वजनिक नहीं किया जा रहा।
यह घटना सीधे तौर पर राज्य की कानून-व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है।
हालांकि घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया है। सीएसपी सतना डी.पी.एस. चौहान ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि आरोपियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही बड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सीएसपी सहित थाना प्रभारी लगातार क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं, संदिग्धों को चिन्हित किया जा रहा है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है, अगर प्रशासन इतना ही सक्रिय है, तो घटना के तुरंत बाद कड़ा एक्शन क्यों नहीं हुआ? क्या इन उपद्रवियों को किसी का संरक्षण प्राप्त है? क्या यही कारण है कि लोग आज भी डर के साए में जी रहे हैं और बयान देने से बच रहे हैं?
अब देखना यह होगा कि चिन्हित किए गए आरोपियों पर क्या वास्तव में ऐसी कार्रवाई होती है, जो नजीर बने। पुलिस और प्रशासन के सामने सिर्फ गिरफ्तारी की नहीं, बल्कि भरोसा बहाल करने की भी चुनौती है। अगर दोषियों को सख्त सजा नहीं मिली, तो यह दहशत सिर्फ इस मोहल्ले तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे शहर के लिए खतरे की घंटी बन जाएगी……

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