ममता की आखिरी छलांग: बेटी को बचाया, खुद खदान में समा गई मां…….

सतना में सिस्टम पर सवाल….
खुली खदानें बनीं मौत का जाल, सुरक्षा के नाम पर शून्य इंतजाम! प्रशासन और संचालक कब लेंगे जिम्मेदारी?
सतना जिले के बाबूपुर चौकी अंतर्गत ग्राम छुलहानी पंचायत बांठिया कला से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने इंसानियत, ममता और सिस्टम तीनों को एक साथ कठघरे में खड़ा कर दिया है। यहां रेखा बेलदार नाम की एक मां ने अपनी 17 वर्षीय बेटी को मौत के मुंह से खींच लाने के लिए खुद अपनी जान कुर्बान कर दी।
घटना उस समय की है जब मां-बेटी गांव के पास स्थित एक गहरी खदान में कपड़े धोने गई थीं। रोजमर्रा की तरह सब सामान्य था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अचानक बेटी का पैर फिसला और वह गहरे पानी में डूबने लगी। यह दृश्य देखते ही मां का मन नहीं, उसकी ममता जाग उठी, बिना एक पल सोचे रेखा बेलदार ने खदान में छलांग लगा दी।
संघर्ष के उन चंद पलों में उसने अपनी बेटी को तो किनारे तक पहुंचा दिया, लेकिन खुद गहराई में समा गई। उसकी सांसें थम गईं, लेकिन उसकी ममता अमर हो गई।
यह घटना हर आंख को नम कर देने वाली है, एक मां जिसने अपनी संतान के लिए अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगा दी,
दुर्घटना के बाद लोगों व परिजनों मे आक्रोश है उनका कहना हैं कि यह दुर्घटना शाशन-प्रशासन और खदान संचालकों की घोर लापरवाही के कारण हुई है? आखिर ये खदानें खुले मौत के कुएं बनकर क्यों पड़ी हैं? न कोई सुरक्षा घेरा, न चेतावनी बोर्ड, न ही किसी तरह की निगरानी। क्या प्रशासन को इन खतरों की जानकारी नहीं, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक ऐसी घटनाएं यूं ही होती रहेंगी? कितनी और मांएं अपनी जान गंवाएंगी तब जाकर जिम्मेदारों की नींद खुलेगी?
लोगों कि मांग है कि प्रशासन सख्त कदम उठाए और ऐसे लापरवाह खदान संचालकों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे। वहीं मौके पर पहुंची पुलिस ने गोताखोरों की मदद से महिला का शव बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। व जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने एक अमिट सवाल छोड़ दिया है, क्या एक मां की कुर्बानी भी सिस्टम को जगा पाएगी?