मैहर में प्रदर्शन बना हादसा: आग की लपटों में घिरे ट्रैफिक प्रभारी, राजनीति की आग में झुलसी जिम्मेदारी…..

मैहर के अलाउद्दीन तिराहे पर शुक्रवार को कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक भयावह हादसा हो गया। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, राजेंद्र शुक्ल, विजय शाह और कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ पुतला दहन कर रहे कार्यकर्ताओं के बीच ड्यूटी पर तैनात यातायात प्रभारी विक्रम पाठक अचानक आग की चपेट में आ गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुतले में आग लगाते समय कथित तौर पर पेट्रोल के छींटे उनकी वर्दी पर पड़ गए। देखते ही देखते आग भड़क उठी और उनकी पीठ व शरीर का निचला हिस्सा लपटों में घिर गया। घटना का वीडियो सामने आया है, जिसमें अफरा-तफरी का माहौल साफ दिखाई देता है। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और नागरिकों ने तत्परता दिखाते हुए कंबल और पानी की मदद से आग बुझाई और घायल अधिकारी को तत्काल सिविल अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने उन्हें गंभीर रूप से झुलसा हुआ बताया है, हालांकि फिलहाल वे खतरे से बाहर हैं।
घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया। मैहर की कलेक्टर रानी बाटड ने जांच के निर्देश दिए हैं, वहीं पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह ने पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की बात कही है। अलाउद्दीन तिराहे और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर विरोध की राजनीति कब तक आग के सहारे चलेगी? पुतला दहन जैसे कार्यक्रमों में ज्वलनशील पदार्थों का उपयोग क्या प्रशासन की निगरानी में होता है या सब कुछ भीड़ के भरोसे छोड़ दिया जाता है? क्या राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं को सुरक्षित और संयमित प्रदर्शन की सीख नहीं दे सकते?
यह केवल एक अधिकारी के झुलसने की घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की चूक का आईना है। जब कानून-व्यवस्था संभालने वाला ही सुरक्षा के अभाव में आग की भेंट चढ़ जाए, तो आम नागरिक की सुरक्षा का भरोसा किस आधार पर टिका रहेगा?
प्रशासन को चाहिए कि ऐसे आयोजनों के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तय करे, ज्वलनशील पदार्थों के उपयोग पर सख्त नियंत्रण लगाए और राजनीतिक दलों को जवाबदेह बनाए। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन वह किसी की जान जोखिम में डालकर नहीं हो सकता। आखिर यह आग कब तक यूं ही सुलगती रहेगी?

बाइट- रानी बाटड (DM मैहर)
बाइट- अवधेश प्रताप सिंह, एसपी मैहर।