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जिला अस्पताल में नशे में ड्यूटी, मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़?….

वार्ड नंबर 6 में कंपाउंडर पर बदसलूकी और पैसों की मांग के आरोप, प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल…..

सतना जिला अस्पताल एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। सोमवार रात वार्ड नंबर 6 में ड्यूटी पर तैनात एक कंपाउंडर को कथित रूप से नशे की हालत में पाया गया। आरोप है कि उसने मरीजों और उनके परिजनों से न केवल अभद्र व्यवहार किया, बल्कि पैसों की मांग भी की। घटना के बाद वार्ड में हंगामे की स्थिति बन गई और स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कंपाउंडर नाइट ड्यूटी के दौरान असंतुलित अवस्था में था। मरीजों के परिजनों ने जब आपत्ति जताई तो वह उलझ पड़ा। शिकायत पर जब अस्पताल के गार्ड पहुंचे, तो उनसे भी तीखी बहस हुई। स्थिति बिगड़ती देख परिजनों और गार्डों ने मिलकर उसे वार्ड से बाहर निकाला और अलग कमरे में बैठाया, ताकि हालात सामान्य हो सकें।

बताया जा रहा है कि संबंधित कर्मचारी का नाम शोभा है और वह पहले भी नशे में ड्यूटी पर आने के आरोपों में घिर चुका है। यदि यह सच है तो बड़ा सवाल यह है कि अस्पताल प्रबंधन अब तक मौन क्यों रहा? क्या मरीजों की जान से जुड़े इस संवेदनशील संस्थान में ड्यूटी के दौरान नशे जैसी गंभीर लापरवाही को अनदेखा किया जाता रहा?
जिला अस्पताल पहले ही संसाधनों और व्यवस्थाओं को लेकर आलोचना झेलता रहा है। ऐसे में ड्यूटी पर नशे की घटना न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि यह मरीजों की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है।

अब जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर है कि वे इस मामले में निष्पक्ष जांच कर ठोस कार्रवाई करें। सवाल केवल एक कर्मचारी का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही का है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आम जनता का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से और कमजोर होगा।

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