जब शंकराचार्य सुरक्षित नहीं, तो धर्म-सनातन और हिंदू कैसे सुरक्षित होंगे?- नारायण त्रिपाठी…….

मैहर के पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रयागराज में आयोजित मिनी कुंभ माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अभिमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए घटनाक्रम को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि जिस देश और प्रदेश में शंकराचार्य जैसे सर्वोच्च धर्माचार्य सुरक्षित नहीं हैं, वहां धर्म, सनातन और हिंदू समाज की सुरक्षा की बातें खोखली प्रतीत होती हैं।
नारायण त्रिपाठी ने तीखे शब्दों में कहा कि एक ओर राजनीतिक मंचों से “हिंदू बटेगा तो कटेगा”, “सनातन खतरे में है” जैसे नारे दिए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर कुंभ जैसे पवित्र आयोजन में शंकराचार्य का अपमान होना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्य सनातन परंपरा के मूल्यों के विपरीत हैं और इन पर माफी मांगना भी अपमान की भरपाई नहीं कर सकता।
पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि हिंदू और सनातन की बातें केवल चुनाव और वोट की राजनीति तक सीमित रह गई हैं। जब धर्माचार्यों के सम्मान और सुरक्षा की बात आती है, तब वही लोग मौन हो जाते हैं। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि वह इस दोहरी राजनीति को समझे और ऐसे नेतृत्वकर्ताओं से सावधान रहे, जो धर्म का उपयोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए करते हैं।
नारायण त्रिपाठी ने कहा कि यदि वास्तव में सनातन, धर्म और हिंदू समाज को बचाना है, तो धर्माचार्यों, संतों, कथावाचकों और विद्वानों को एकजुट होकर धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों को जवाब देना होगा। समाज को यह तय करना होगा कि धर्म केवल नारा नहीं, बल्कि आचरण और सम्मान की परंपरा है।