दिखावे की कार्रवाई पर वाहवाही लूटने की कोशिश, गंदगी के असली अड्डों पर कार्रवाई कब?……
अमित मिश्रा/सतना।

सतना। नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों में है। शहरभर में जहां गंदगी का अंबार लगा है, वहां जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। इसके उलट नगर निगम अमला उन्हीं स्थानों की फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर वायरल करता है, जहां पहले से सफाई रहती है या जहां दुकानदार और होटल संचालक हर महीने ₹1000 की रसीद कटवाते हैं।
सूत्र बताते हैं कि यह रसीद दरअसल एक तरह का “सुविधा शुल्क” है। कचरा गाड़ी समय पर ले जाने के एवज में होटल व दुकानदार नियमित रूप से यह रकम देते हैं। निगम अमला इसी रसीद काटते वक्त की फोटो खिंचवाकर उसे सोशल मीडिया पर ‘सख्त कार्यवाही’ बताकर प्रचारित करता है। हकीकत में यह दिखावा ही है, क्योंकि जिन जगहों पर वास्तव में गंदगी का अंबार है, वहां कोई कार्यवाही होती ही नहीं।
इधर, स्वास्थ्य विभाग ने आज को पॉलीथीन रखने वाले कुछ दुकानदारों एवं होटल संचालकों पर छापामार कार्रवाई कर ₹8500 का स्पॉट फाइन वसूलते फोटोज सोशल मीडिया में वायरल की हैं। लेकिन सवाल उठ रहा है कि जब महीने में दुकानदार खुशी-खुशी हजारों यह रुपये रसीद के नाम पर देते हैं, तो फिर इसमें कार्रवाई को लेकर वाहवाही लूटने की क्या जरूरत थी?
वही शहरवासी नाराज़ हैं कि जिन बाजारों और होटलों में खुलेआम गंदगी फैली है और जहां बैन की गई पॉलीथीन धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रही है, वहां पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की जाती। केवल चुनिंदा दुकानदारों जहां से हर माह पैसे मिलते हैं और रसीद कटती है उन्ही की वसूली वाली फोटो सोशल मीडिया पर वायरल करना न तो स्वच्छता अभियान है और न ही सख्त कार्रवाई। यही कारण है कि नगर निगम स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।