भोपाल-इंदौर से लेकर सतना तक जिलाध्यक्ष चयन पर बगावत, राहुल गांधी नाराज: बोले- एमपी जैसी गलतियां दूसरे राज्यों में न दोहराई जाएं…….
अमित मिश्रा/सतना।

सतना। मध्यप्रदेश कांग्रेस में हाल ही में घोषित जिला अध्यक्षों को लेकर बवाल मचा हुआ है। प्रदेश के कई जिलों से विरोध दर्ज कराया गया है, जिसमे गहरी नाराजगी सतना जिले से भी सामने आई है। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस पर सख्त नाराजगी जताई है। उन्होंने साफ कहा कि मध्यप्रदेश से सबसे ज्यादा शिकायतें आई हैं, यहां जो गलतियां हुईं, वैसी अन्य राज्यों में नहीं होनी चाहिए।
दरअसल, 16 अगस्त को प्रदेश कांग्रेस ने 71 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्षों की घोषणा की थी। इसके बाद से ही विरोध का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। भोपाल, इंदौर, डिंडोरी, बुरहानपुर और देवास के साथ-साथ सतना जिले में भी नाराजगी खुलकर सामने आई है।
सतना का मामला इस वजह से चर्चाओं में है क्योंकि यहाँ ग्रामीण जिलाध्यक्ष के रूप में सिद्धार्थ कुशवाह का नाम घोषित किया गया है। सिद्धार्थ वर्तमान में विधायक हैं, वे महापौर और लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं और प्रदेश स्तर पर ओबीसी कांग्रेस के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक व्यक्ति, एक पद की नीति का क्या हुआ? क्या जिले में केवल एक ही चेहरा बाकी रह गया है जिसे हर बार प्राथमिकता दी जा रही है? लगातार उन्हीं को मौका दिए जाने से कई कार्यकर्ताओं में गहरी असंतुष्टि है।
वहीं सतना शहर अध्यक्ष पद पर इकबाल को जिम्मेदारी दी गई है। स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी संगठन में संघर्ष करने वाले पुराने नेताओं को दरकिनार कर अचानक किसी अनजान चेहरे को शहर अध्यक्ष बना दिया गया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि हमने यह नाम पहली बार सुना है, जबकि जमीन पर सक्रिय और लंबे समय से संघर्ष कर रहे लोगों की अनदेखी कर दी गई। इससे जिले में गुटबाजी और बढ़ने का खतरा बताया जा रहा है।
प्रदेश के अन्य जिलों में भी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे। भोपाल में नियुक्ति के विरोध में खून से खत लिखे गए, इंदौर ग्रामीण में दिल्ली तक प्रदर्शन हुए, डिंडोरी में पुतला दहन हुआ, बुरहानपुर में पदाधिकारी ने इस्तीफा दे दिया और देवास में नेता ने सभी पद छोड़ दिए।

इन सबके बीच राहुल गांधी की नाराजगी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय पर आयोजित बैठक में साफ कहा कि संगठन को मजबूत करना है तो पारदर्शी और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया जरूरी है। यदि कार्यकर्ताओं का विश्वास टूटता है तो यह पार्टी के लिए खतरनाक साबित होगा।
सतना सहित अन्य जिलों में मचे घमासान से साफ है कि कांग्रेस आलाकमान के सामने अब संगठन को संभालना बड़ी चुनौती बन चुका है। सतना का मामला प्रदेश कांग्रेस के लिए लिटमस टेस्ट साबित हो सकता है क्योंकि यहां की नाराजगी थमना आसान नहीं दिख रही। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो कांग्रेस को चुनावी मैदान में इसका बड़ा खामियाजा उठाना पड़ सकता है।