भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर ब्राह्मण समाज का महाकुंभ, सतना में गूंजेगा जय परशुराम……..

सतना। 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भगवान परशुराम जन्मोत्सव को लेकर ब्राह्मण समाज में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। ब्राह्मण एकता समन्वय समिति के तत्वावधान में आयोजित यह भव्य आयोजन इस बार महाकुंभ का रूप लेता नजर आ रहा है, जिसमें युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी बढ़-चढ़कर सहभागिता निभा रहे हैं।

रामलीला मैदान से सुभाष पार्क तक निकलने वाली विशाल शोभायात्रा शाम 4 बजे सिटी कोतवाली के पीछे गुरुनानक द्वार से प्रारंभ होगी। यात्रा में सजीव झांकियां, सुसज्जित रथ, पारंपरिक वाद्ययंत्र और पूज्य साधु-संतों का सानिध्य आकर्षण का केंद्र रहेगा। जय परशुराम के जयघोष से पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में सराबोर होगा।
भगवान परशुराम, जिन्हें विष्णु के छठे अवतार के रूप में जाना जाता है, उनकी वीरता, तपस्या और धर्म रक्षा के लिए समर्पण आज भी समाज को प्रेरित करता है। उन्होंने अन्याय और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष कर धर्म की स्थापना की और शस्त्र व शास्त्र दोनों में अद्वितीय संतुलन का संदेश दिया। उनके जीवन से परिश्रम, अनुशासन और समाजहित के लिए संघर्ष की प्रेरणा मिलती है।
इस आयोजन की खास बात यह है कि इसमें मातृ शक्ति की भागीदारी भी उल्लेखनीय है। बैठक में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उपस्थित होकर आयोजन को सफल बनाने का संकल्प लिया। वहीं युवा वर्ग में भी जबरदस्त जोश देखा जा रहा है, जो इस सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। बुजुर्गों का मार्गदर्शन और अनुभव इस आयोजन को और अधिक गरिमामय बना रहा है।
आयोजन समिति ने बताया कि शोभायात्रा के समापन पर सुभाष पार्क में सभी विप्रजनों के लिए स्नेह भोज की व्यवस्था की गई है। समाज ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया है, जिससे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश पूरे क्षेत्र में पहुंचे।
युवाओं की अगुवाई में जन्मोत्सव को भव्य बनाने की मुहिम, सर्व समाज को जोड़ने का प्रयास तेज।
भगवान परशुराम जन्मोत्सव को इस ऐतिहासिक और सर्वसमावेशी बनाने के लिए शहर के युवाओं ने कमान संभाल ली है। लगातार बैठकों और जनसंपर्क के माध्यम से युवा वर्ग न केवल ब्राह्मण समाज, बल्कि सर्व समाज को एक मंच पर लाने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है।बीते दिनों विभिन्न स्थानों पर आयोजित बैठकों में प्रबुद्ध जनों, समाजसेवियों, वरिष्ठजनों और मातृशक्ति को जोड़ने की पहल की गई।
युवाओं का मानना है कि भगवान परशुराम का जीवन केवल एक समाज तक सीमित नहीं, बल्कि समूचे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है, इसलिए जन्मोत्सव भी व्यापक सहभागिता के साथ मनाया जाना चाहिए।
युवाओं ने वरिष्ठजनों के अनुभव और महिलाओं की सहभागिता को इस आयोजन की ताकत बताते हुए सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की रणनीति बनाई है। बैठकों में यह भी तय किया गया कि शोभायात्रा को भव्य स्वरूप देने के लिए आकर्षक झांकियां, अनुशासित रैली और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को शामिल किया जाएगा, जिससे आयोजन का संदेश दूर तक पहुंचे।
हर वर्ष की तरह इस बार भी शहर में विभिन्न स्थानों पर उपनयन संस्कार और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, लेकिन इस बार युवाओं की विशेष पहल के चलते इन सभी गतिविधियों को एक सूत्र में पिरोकर सामूहिक रूप से मनाने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
युवा वर्ग पूरे उत्साह के साथ रैली की तैयारियों में जुटा है। घर-घर संपर्क कर लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है और जन्मोत्सव को उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाने का संदेश दिया जा रहा है।
आयोजन से जुड़े युवाओं का कहना है कि यह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत करने का अवसर है। इसी सोच के साथ सभी को जोड़ने और भव्य आयोजन सुनिश्चित करने के लिए प्रयास लगातार जारी हैं।



