ऑपरेशन के बाद विवाद या गलतफहमी? निजी अस्पताल में हंगामे के बीच उठे कई सवाल…..

सतना। शहर के एक बड़े और प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में ब्रेन ट्यूमर ऑपरेशन के बाद हुए हंगामे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए, वहीं दूसरी ओर अस्पताल सूत्रों और जानकारों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में किडनी निकालने जैसी बात सही नहीं पाई गई है।
बिरसिंहपुर निवासी 50 वर्षीय जमुनिया बाई साकेत को 29 मार्च को भर्ती कर 1 अप्रैल को ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन किया गया। डॉक्टरों ने 24 से 48 घंटे में होश आने की बात कही थी, लेकिन देरी होने पर परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया। इस दौरान किडनी निकालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए।
हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार किडनी निकालने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल होती है, जिसे नेफ्रोलॉजिस्ट द्वारा विशेष तकनीक, लैप्रोस्कोपिक या रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से किया जाता है। जानकार बताते हैं कि इस तरह की उन्नत सुविधा फिलहाल सतना में उपलब्ध नहीं है, जिससे ऐसे आरोपों पर संदेह भी जताया जा रहा है।
अस्पताल सूत्रों का कहना है कि बढ़ते हंगामे, भारी भीड़ और अन्य मरीजों को हो रही असुविधा को देखते हुए स्थिति नियंत्रण में रखने के लिए प्रबंधन ने राशि वापस की। वहीं कुछ लोगों का यह भी मानना है कि कई बार मरीजों या परिजनों को उकसाकर अस्पतालों में विवादित माहौल बनाया जाता है।
स्थानीय स्तर पर चर्चाएं यह भी हैं कि यदि आरोप गंभीर थे, तो राशि वापसी के बाद मामला अचानक शांत कैसे हो गया। हालांकि, यह भी सच है कि बड़े अस्पतालों पर इस तरह के आरोप समय-समय पर लगते रहे हैं। एक ओर मरीज बेहतर सुविधाएं चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर असंतोष की स्थिति में आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आते हैं।
पूरे मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, भरोसे और संवाद की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
हरिशंकर मिश्रा PRO बिरला अस्पताल।