कोठी में चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था, शाम होते ही लाचार मरीज…..
आदित्य मिश्रा/कोठी।

कोठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है, शाम 6 बजे के बाद यहां मरीजों को डॉक्टर मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है, ताजा मामला आज शाम का है, जब हाथ में चोट लगने के बाद एक मरीज इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचा, लेकिन पूरा अस्पताल जिम्मेदारों की गैरमौजूदगी की गवाही देता नजर आया।

डॉक्टर रूम खाली पड़े थे, न कोई चिकित्सक मौजूद था और न ही ऐसा कोई जिम्मेदार कर्मचारी जो मरीज को प्राथमिक उपचार या आगे की व्यवस्था के बारे में बता सके, अस्पताल से बाहर निकलने पर एक नर्स जरूर मिलीं, लेकिन उन्होंने साफ कह दिया कि उनका ड्यूटी टाइम समाप्त हो चुका है और वे मरीज को नहीं देख सकतीं, यह जवाब अपने आप में सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करता है,
यह कोई एक केंद्र की कहानी नहीं है, जिले में लगातार आयुष्मान हॉस्पिटल, सतना डायग्नोस्टिक सेंटर और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में लापरवाहियों के मामले सामने आ रहे हैं।

बावजूद इसके जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई न होने से कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं,
एक ओर प्रदेश सरकार और बड़े अधिकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के मजबूत होने के दावे करते नहीं थकते, वहीं दूसरी ओर कोठी जैसे क्षेत्रों में शाम ढलते ही अस्पताल भगवान भरोसे छोड़ दिए जाते हैं, तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर रूम सूने पड़े हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इसी दौरान कोई बड़ी दुर्घटना या गंभीर मरीज आ जाए, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या प्रशासन किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? अब जरूरत है कि प्रशासन जमीनी हकीकत पर ध्यान दे और लापरवाह स्वास्थ्य व्यवस्था पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि मरीजों की जान से हो रहे खिलवाड़ को रोका जा सके…….