चंद रुपयों के लिए अमानवीयता: कंडेक्टर ने मासूम बच्चों को बीच जंगल में बस से उतारा….
आंचलिक डेस्क….आदित्य मिश्रा।

मध्य प्रदेश के सतना जिले से सामने आया एक मामला न सिर्फ मानवता को शर्मसार करता है, बल्कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। चित्रकूट से बिरसिंहपुर मार्ग पर चलने वाली विजय ट्रेवल्स की एक निजी बस में यात्रा कर रहे नाबालिग छात्रों के साथ कंडक्टर द्वारा की गई अमानवीय हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने आमजन को झकझोर कर रख दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चित्रकूट स्थित रघुनाथ मंदिर परिसर के संस्कृत विद्यालय में अध्ययनरत कुछ नाबालिग छात्र मकर संक्रांति की छुट्टियों के बाद अपने-अपने घर लौट रहे थे। ये छात्र चित्रकूट से विजय ट्रेवल्स की बस में सवार हुए, लेकिन बस में अत्यधिक भीड़ होने के कारण उन्हें सीट उपलब्ध नहीं हो सकी। छात्रों का कहना है कि चूंकि वे खड़े होकर यात्रा कर रहे थे, इसलिए उन्होंने आधा किराया देने की बात कही।
इसी बात को लेकर बस कंडक्टर और छात्रों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद बढ़ने पर कंडक्टर ने संयम खो दिया और बस को चित्रकूट थाना क्षेत्र अंतर्गत बगदरा घाटी के घने और सुनसान जंगल में रुकवा दिया। अमानवीयता की हद तब पार हो गई, जब कंडक्टर ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए नाबालिग छात्रों को जबरन बस से नीचे उतार दिया और बस लेकर मौके से रवाना हो गया।
घने जंगल में अकेले छूटे बच्चे भय और असहायता की स्थिति में आ गए। आसपास कोई आबादी नहीं थी और रास्ता भी सुनसान था। गनीमत यह रही कि कुछ समय बाद उसी मार्ग से गुजर रही एक अन्य बस के कर्मचारियों ने बच्चों को डरा-सहमा देखा। उन्होंने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए बस रोकी और बच्चों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाया।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है। लोग परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि विजय ट्रेवल्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, बस का परमिट निरस्त किया जाए और संबंधित कंडक्टर पर कड़ी कानूनी कार्यवाही हो, ताकि भविष्य में किसी भी छात्र या यात्री के साथ इस तरह की घटना दोहराई न जा सके।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि सुनसान जंगल में बच्चों के साथ कोई अनहोनी हो जाती या जंगली जानवरों का हमला हो जाता, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। यह घटना न सिर्फ एक बस कंडक्टर की लापरवाही, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही पर भी गहन चिंतन की मांग करती है।