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डॉग बाइट का बढ़ता खतरा: सतना में 8 दिन में 1020 मामले, जिला अस्पताल में रोज 120 से अधिक लोग लगवा रहे रैबीज वैक्सीन…..

आदित्य मिश्रा कोठी/सतना।

सतना। सतना जिले में डॉग बाइट की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। सरकारी अस्पतालों के आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को साफ तौर पर उजागर कर रहे हैं। बीते आठ दिनों में अकेले जिला अस्पताल में डॉग बाइट के बाद 1020 लोग रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंचे हैं। इनमें वैक्सीन की दूसरी और तीसरी खुराक लेने वाले पीड़ित भी शामिल हैं।

जिला अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 120 से अधिक लोग रैबीज वैक्सीन के लिए पहुंच रहे हैं। यदि सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और अन्य शासकीय संस्थानों के आंकड़े जोड़ दिए जाएं, तो यह संख्या प्रतिदिन 150 से अधिक हो जाती है। इसके अलावा कई पीड़ित निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में भी इलाज करवा रहे हैं।

राहत की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग के पास रैबीज वैक्सीन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। जिला अस्पताल स्टोर में फिलहाल 23,500 खुराकें और सीएमएचओ कार्यालय के स्टोर में 2,500 खुराकें मौजूद हैं। इस तरह कुल 26,000 खुराकों का स्टॉक रखा गया है। जरूरत के अनुसार सीएमएचओ स्टोर से अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को भी वैक्सीन की आपूर्ति की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक जिले में सालाना करीब 30,000 खुराक रैबीज वैक्सीन की खपत होती है, जो सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क लगाई जाती है।

पशु चिकित्सालय के प्रभारी डॉ. बृहस्पति भारती के अनुसार नवंबर से फरवरी के बीच मादा कुत्तों का प्रजनन काल होता है। इस दौरान हार्मोनल बदलाव के कारण कुत्ते अधिक चिड़चिड़े और आक्रामक हो जाते हैं, जिससे डॉग बाइट की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
रैबीज कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. प्रदीप गौतम ने बताया कि डॉग बाइट के बाद घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से धोना चाहिए और 24 घंटे के भीतर नजदीकी अस्पताल पहुंचकर वैक्सीन लगवाना जरूरी है। लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। वहीं सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने कहा कि पीड़ितों की सुविधा के लिए जिला अस्पताल में अलग इंजेक्शन कक्ष बनाया गया है और वैक्सीन की कोई कमी नहीं है।

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