मतलबी दुनिया में मानवता की मिसाल. 30 वर्षों से बेजुबानों की नि:स्वार्थ सेवा में समर्पित दंपत्ति……

गेस्ट ऑफ़ द वीक……
आज के समय में जहाँ इंसान इंसान से ही मुंह मोड़ लेता है, वहीं सतना के मुख्त्यारगंज में रहने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक दंपत्ति माया मिश्रा और संजय मिश्रा, बेजुबानों के लिए जीने की मिसाल बन चुके हैं।
पिछले 30 वर्षों से दोनों ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा उन प्राणियों की सेवा में समर्पित कर दिया है, जिनकी पुकार अक्सर समाज अनसुनी कर देता है।
माया जी बताती हैं कि यह सफर एक छोटे-से संकल्प से शुरू हुआ था, हमने एक चिड़िया को दाना डालना शुरू किया… और फिर लगा कि शायद यही हमारा असली जीवन है।
आज वे अपनी आय का करीब 70% हिस्सा गौवंश, कुत्तों, पक्षियों और अन्य घायल या भूखे जानवरों की देखभाल पर खर्च करती हैं।
सुबह 4:30 बजे से ही सेवा का एक नया दिन शुरू होता है, दाना-पानी, बीमार जानवरों का इलाज, गायों के लिए भूसा, आवारा कुत्तों के लिए रोटी यह सब बिना किसी स्वार्थ, बिना किसी पहचान के।
उनके घर के द्वार पर प्रतिदिन
60–70 गायें, कई कुत्ते और सैकड़ों पक्षी
प्यार और विश्वास के साथ आते है और मानवता को नया अर्थ दे जाते हैं।
यह दंपत्ति हमें सिखाता है धर्म सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं, बल्कि उन प्राणियों की रक्षा में है जो अपनी तकलीफ कह नहीं पाते, जरूरत है कि समाज में ऐसे और हाथ आगे आएं क्योंकि बेजुबानों के जीवन में थोड़ा-सा स्नेह भी चमत्कार कर सकता है। मानवता जिंदा है, बस हममें से किसी एक को शुरुआत करनी होती है…….