बेटियों के सम्मान पर खामोशी क्यों? समाज पूछ रहा अपने नेताओं से सवाल!……
अमित मिश्रा/सतना।

पिछले दो दिनों से ब्राह्मण समाज की बेटियों के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर समाज में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। कई संगठन, समाजसेवी व जागरूक नागरिक विरोध दर्ज करा रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन जनप्रतिनिधियों को समाज ने अपने मतों से सम्मानित पदों तक पहुँचाया, वे आज इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं?
संतोष वर्मा द्वारा मंच से दिया गया बयान… 👇
जनता यह पूछ रही है कि जब चुनाव का समय आता है, तब नेता समाज के बीच पहुंचते हैं, जाति के नाम पर समर्थन मांगते हैं, अपने को समाज का हितैषी साबित करते हैं, लेकिन आज जब समाज की बेटियों के सम्मान का सवाल खड़ा हुआ है, तब वही जनप्रतिनिधि खामोशी की चादर ओढ़े क्यों बैठे हैं?
सवाल नेताओं से यह है कि क्या समाज की बेटियों का सम्मान उनके लिए वोट बैंक से भी कम महत्वपूर्ण है? क्या केवल चुनावी मंचों पर किए गए वादे ही उनका वास्तविक चरित्र हैं?
इसी बीच, सतना जिले में कुछ कांग्रेसी एवं भाजपा नेताओं जैसे अरुण द्विवेदी सहित चुनिंदा प्रतिनिधियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखी और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सामाजिक क्षेत्रों से भी आवाजें उठी हैं, ब्राह्मण संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने भोपाल में सीएम से लेकर बड़े जनप्रतिनिधि अधिकारियो से मिल तत्काल कार्यवाही की माँग की, सतना से वरिष्ठ समाजसेवी शंभूचरण दुबे, प्रदीप समदरिया, राजेश दुबे, स्वतंत्र मिश्रा, रितेश त्रिपाठी, अवनीश शर्मा, प्रमोद पांडे अनुज विराट शुक्ला, अनुराग दुवे, व अन्य नागरिकों ने थाना और कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया, महिला शक्तियों ने भी आगे आकर अपनी आवाज बुलंद की, मैहर से ब्राह्मण समाज की पदाधिकारी पूर्वी पांडे, रीवा से प्रतिमा मिश्रा, सतना से जया द्विवेदी, सहित दर्जनों नेत्रियों ने जिम्मेदारों से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
देश में बेटियों को देवी का दर्जा दिया जाता है। ऐसी भूमि पर यदि समाज की बेटियों को अपमानित करने वाली बातें कही जाती हैं, तो यह केवल किसी एक समाज का नहीं बल्कि पूरे भारतीय समाज का अपमान है। यह मुद्दा किसी जाति विशेष का नहीं, बेटियों के सम्मान का है।
विंध्य क्षेत्र सहित प्रदेश के बड़े जनप्रतिनिधियों से जनता यह भी प्रश्न कर रही है कि आप कब सामने आएंगे? कब अपने पद और प्रतिष्ठा का उपयोग बेटियों की गरिमा बचाने में करेंगे? चाहे अभिव्यक्ति सीमित और संवैधानिक मर्यादाओं में ही क्यों न हो, साहसिक हस्तक्षेप जरूरी है।
नेताओं से जनता का स्पष्ट संदेश है- हमने आपको सत्ता देने के लिए नहीं, समाज की रक्षा के लिए चुना है।
लोग कह रहे अब खामोशी नहीं, कार्रवाई और स्पष्ट पक्ष चाहिए।
बेटियों के सम्मान पर कोई समझौता नहीं, आज भी नहीं, कभी नहीं….
संतोष वर्मा के विरोध में कुछ नेताओं/समाजसेवियों ने दी अपनी प्रतिक्रिया, जताया विरोध!….👇
शंभूचरण दुबे वरिष्ठ समाजसेवी सतना।
पुष्पेंद्र मिश्रा प्रदेश अध्यक्ष अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज।
राजेश दुबे ब्राह्मण समाज नेता सतना।
प्रदीप समदरिया, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सतना।
स्वतंत्र मिश्रा, युवक कांग्रेस नेता सतना।