आयुष्मान हॉस्पिटल के बाहर अवैध पार्किंग से जाम, प्रशासन और यातायात पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल….
अमित मिश्रा/सतना।

सतना। सर्किट हाउस खजुरीटोला स्थित आयुष्मान हॉस्पिटल के बाहर अवैध पार्किंग की समस्या दिनों-दिन विकराल रूप ले रही है। अस्पताल के सामने मुख्य मार्ग पर प्रतिदिन सैकड़ों वाहनों की कतार लग जाती है, जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है। इससे न केवल आम राहगीर बल्कि आसपास के मोहल्ले के निवासी भी परेशान हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर शिकायतों के बाद भी यातायात पुलिस और नगर प्रशासन इस समस्या पर आंख क्यों मूंदे हुए हैं।

सड़क बनी निजी पार्किंग
अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने आते हैं। परिजन पार्किंग शुल्क से बचने और अंदर व्यवस्था के अभाव में वाहन सीधे बाहर सड़क पर खड़े कर देते हैं। परिणामस्वरूप सीसी रोड पर दिनभर यातायात प्रभावित रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस वजह से वे अपने घरों से वाहन तक नहीं निकाल पाते। किसी भी समय बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। सवाल यह है कि आखिर सार्वजनिक मार्ग को निजी पार्किंग बनाने की अनुमति किसने दी?
कार्रवाई क्यों नहीं?
निवासियों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद यातायात पुलिस और नगर निगम चुप्पी साधे बैठे हैं। शहर के अन्य इलाकों में चालानी कार्रवाई होती है, लेकिन आयुष्मान हॉस्पिटल के बाहर कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या प्रशासन किसी दबाव में है या फिर इसमें आपसी सांठगांठ है? कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा कि पैसों के लेनदेन के कारण यातायात पुलिस मौन सहमति दे रही है।
अस्पताल प्रबंधन ने जिम्मेदारी टाली
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वे मरीजों और परिजनों को सड़क पर वाहन न खड़ा करने की हिदायत देते रहते हैं। उनका दावा है कि कई बार नगर निगम और यातायात पुलिस को सूचित किया गया, लेकिन न तो कोई अधिकारी मौके पर आया और न ही ठोस कदम उठाया गया। दूसरी ओर, नागरिकों का आरोप है कि अस्पताल के अंदर पार्किंग स्थल पर अत्यधिक शुल्क वसूला जाता है, जिसके चलते लोग सड़क पर वाहन खड़े करना बेहतर समझते हैं। वहीं अस्पताल गेट पर सुरक्षा गार्ड की अनुपस्थिति से स्थिति और बिगड़ जाती है।
जनता का बढ़ता आक्रोश
क्षेत्रीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही यातायात पुलिस और नगर प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि अवैध पार्किंग रोकने और निःशुल्क या नियमानुसार पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन और अस्पताल दोनों की जिम्मेदारी है।
बड़ा सवाल
- आखिर बार-बार शिकायतों के बाद भी यातायात विभाग कार्रवाई क्यों नहीं करता?
- क्या अस्पताल प्रबंधन को सड़क को निजी पार्किंग बनाने का अधिकार है?
- क्या पैसों के लेनदेन और मिलीभगत के कारण यह समस्या लगातार बढ़ रही है?
- जिम्मेदारी से बचने पर आखिर जनता के आक्रोश का सामना कौन करेगा?
यदि प्रशासन और यातायात विभाग ने समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया तो स्थिति किसी भी दिन बड़ा विवाद खड़ा कर सकती है। व बड़ी दुर्घटना हो सकती है। जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है, वरना जनता का भरोसा प्रशासन पर से उठना तय है।