153 करोड़ की जमीन पर फिर कब्जे की कोशिश, आखिर कब तक? सेल की 34 एकड़ भूमि पर हंगामा, प्रशासन की सख्ती से टला बड़ा विवाद…..

सतना में एक बार फिर सरकारी जमीन पर कब्जे की कोशिश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
बाबूपुर स्थित स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की करीब 34 एकड़ 89 डिसमिल, लगभग 153 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन पर रविवार दोपहर सैकड़ों लोगों की भीड़ पहुंच गई।

बताया जा रहा है कि आदतन अपराधी बालगोविंद चौधरी के नेतृत्व में यह जुटान हुआ, जिससे करीब आधे घंटे तक मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही।
सूचना मिलते ही रामस्थान राजस्व सर्किल के नायब तहसीलदार राजेश सिंह और चौकी प्रभारी शुभम नागभिरे पुलिस बल के साथ पहुंचे। प्रशासन की सख्ती के बाद स्थिति नियंत्रित हुई, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बार-बार ऐसी कोशिशें हो कैसे रही हैं? भीड़ में बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी भी कई आशंकाओं को जन्म देती है, क्या लोगों को गुमराह कर जमीन दिलाने का झांसा दिया जा रहा है?
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 5 जनवरी को भी इसी जमीन पर कब्जे की कोशिश की जा चुकी है। बार-बार एक ही संपत्ति निशाने पर आना साफ संकेत देता है कि कहीं न कहीं सुरक्षा और निगरानी में कमी है। जानकारों का आरोप है कि सस्ती जमीन का लालच देकर लोगों को आगे किया जाता है, जबकि पीछे से कुछ प्रभावशाली तत्व खेल खेलते हैं।
प्रशासन ने बीजेसीएल के स्थानीय लाइजनिंग ऑफिसर (लैंड) विजय सिंह को तलब कर संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। चेतावनी भी साफ है, यदि समय रहते कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो कानून व्यवस्था बिगड़ने की जिम्मेदारी तय होगी।
अब सवाल जिम्मेदारों से है, सरकारी जमीन की सुरक्षा की ठोस व्यवस्था क्यों नहीं? बार-बार चेतावनी के बावजूद ऐसी घटनाएं क्यों दोहराई जा रही हैं? यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो मुफ्त जमीन की होड़ किसी बड़े संघर्ष में बदल सकती है। प्रशासन अलर्ट मोड पर है, लेकिन स्थायी समाधान कब होगा?
वही हंगामे के दौरान बालगोविंद चौधरी खुलेआम यह धमकी देते सुना गया कि यदि कार्रवाई की गई तो पूरा सतना ब्लॉक कर दिया जाएगा।